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Excerpt for यदि इच्छाएं घोड़े थे If Wishes Were Horses (हिंदी संस्करण) (Hindi Edition) by , available in its entirety at Smashwords

यदि इच्छाएं घोड़े थे

नदी का गीत

पुस्तक 1

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लेखिका

ऐना ऐरिशकीगल

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हिंदी संस्‍करण

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अनुवाद

देवमित्रा अभिषेक पाल

प्रतिलिप्‍यधिकार 2014 द्वारा सुरक्षित - ऐना ऐरिशकीगल

(सर्वाधिकार सुरक्षित)



सारांश

बलिवेदी पर फैंकी हुई और खानाबदोश, रोज़ी ज़ालबेडोरा ने आस्‍ट्रेलिया के आंतरिक क्षेत्र के सीमा में गवर्नस की नौकरी ले ली। वहाँ उसकी मुलाकात पीपा ब्रिस्‍टोह नामक एक भावुक बच्‍ची से हुई जो अपने माता-पिता के कटु अलगाव का सामना परियों की रानी और एक सींग वाले जानवर के जादुई दुनिया में पलायन कर करती था।

पीपा को उसके थका देने वाली पढ़ाई-लिखाई में पकड़ जमाने के नियत काम के लिए रोज़ी की नियुक्‍ती की गई और इस तरह वह पीपा के पिता, एडम एवं तेल खादानों की उत्तराधिकारिणी,उनकी स्‍वार्थी पत्‍नी ईवा, के बीच चल रही निगरानी के विवाद में एक मोहरा बन कर रह गई। जैसे-जैसे उनके बीच का तनाव बढ़ता गया और रोज़ी, ब्रिस्‍टोह परिवार के सेंकड़ों भेद की जानकार बनती गई, वैसे-वैसे उसे अपने भयाभय अतीत का भी सामना करना पड़ा। इसी दौरान उसे अपने सुरूप एवं अप्राप्‍य भावना वाले नियोक्‍ता के लिए बढ़ते आकर्षण का भी संघर्ष करना पङेगा। किन्‍तु उसे मदद एक विचित्र वयस्‍क पड़ोसी, मित्रतापूर्ण शहर और हर रात उसके सपनों में आते हुए एक घुड़सवार की छाया के रूप में मिली।

"गर ख्‍वाईशें तुरग होतीं" पारिवारिक गाथा की वह पहली किताब है जो आस्‍ट्रेलिया के पट भूमि पर आधारित की गई है एवं जिसकी शैली जेन आयर की दिल को चीरने वाली गाथिक के मंद स्‍वर एवं अलौकिक संकेतों से अपनाई गई है।

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"एक रहस्‍यमय, जादुई भूदृश्‍य और पौराणिक कथा का एक नवीन जीवन।" —इतिहास के ब्‍लॉग का अफसाना।

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"मैं फौरन पात्रो के जीवन में खींची चली गई, और एैसा महसूस हुआ जैसे में रोज़ी के आस-पास ही हूँ जब वो अपने जीवन को बिखरने से बचाते हुए संघर्ष कर रही थी..." —न्‍यू योर्क टाइम्‍स की सर्वश्रेष्‍ठ बिकने वाली रचनाकार स्‍टेसी जोय नेटज़ेल।

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"रोज़ी और एडम, दोनों ही चोट खाए हुए इंसान हैं------- वह नन्‍ही-सी लड़की, पीपा, बड़ी ही करामाती हैं।( पीपा एक बेहद नाज़ुक बच्‍ची है, जो अपने माता-पिता के घिनौने अभिरक्षा के विवाद में इस तरह उलझी हुई है की आप उसे गले से लगाने पर मजबुर हो जाऐंगे एवं उसे सुरक्षित रखना चाहेंगे..." —डार्क लिलिथ बॉल्‍ग बुक ।



समर्पित

मैं यह किताब उस प्रत्येक शख्‍स़ को समर्पित करना चाहूँगी जिसने भीड़ में होते हुए भी विकराल एवं भयानक अकेलेपन का अनुभव किया है।

आभार

मैं उन सभी लोगों का शुक्रिया करना चाहूँगी जिनकी सहायता के बिना ये उपन्‍यास हार्ड ड्राइव पर कूद-फाँदकर अपनी मौत स्‍वयं मर जाता।

मैं अपने सदा प्रशंसक पति को धन्‍यवाद देना चाहूँगी, जिन्‍होंने मेरे लेखन के शौक को बरदाश्‍त किया। वाकई में, मैं कृतज्ञ हूँ कि वे सवेरा होते ही उठकर हमारे बच्‍चों के लिए नाश्‍ता बनाते थे और थाली से ढक कर उसे गर्म रखने के लिए छोड़ देते थे।

मैं अपने प्‍यारे बच्‍चों का शुक्रिया करना चाहूँगी जिन्‍होंने वर्षो तक उदार उपेक्षा में गुज़ारा किया। जिस वक्‍त उनकी माँ अपने "काल्‍पनिक मित्रों" से बातें करती थी वे खुद उड़ान भरने योग्‍य लेखक बन रहे थे।

मैं अपने मुख्‍य पाठक सिंडी लेपर्ड ग्रीन का तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ जिन्‍होंने उपन्‍यास की सारे त्रुटियों एवं अन्‍य चिन्‍ताजनक तथ्‍यों की ओर मेरा ध्‍यान आकर्षित किया जिससे मैं अपने लेखन में सुधार ला पाई। धन्‍यवाद!

And I'd especially like to think my friends, Kannu Kanjuweet, for all her help and guidance in bringing my vision to life, and Debmitra Pal, with whom this Hindi Edition would not exist. Thank you!



विषय तालिका

सारांश

समर्पित

आभार

विषय तालिका

कहावत

प्रस्तावना

अध्याय 1

अध्याय 2

अध्याय 3

अध्याय 4

अध्याय-5

अध्याय-6

अध्याय-7

अध्याय-8

अध्याय-9

अध्याय-10

अध्याय-11

अध्याय-12

अध्याय-13

अध्याय-14

अध्याय-15

अध्याय-16

अध्याय-17

अध्याय-18

अध्याय-19

पूर्वावलोकन: ड्रीम्स का खैर (नीलामी 2)

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पूर्वावलोकन: गौथिक क्रिसमस ऐन्जल

आपके बहूमुल् समय का एक क्षण देने के लिए निवेदन

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फुटनोट

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कहावत

गर ख्‍वाईशें तुरग होतीं, तो मोहताज़ भी सवारी करते ।

गर शलगमें शमशीर होतीं, तो मेरे पास भी तलवार होती ।

गर "यदि" "तथा" तसला बर्तन होते,

तो शिक्षक के हाथों के लिए कोई कार्य न होता ।

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स्कॉटिश कहावत, 1670



प्रस्तावना

एक उजाङ सी हवा धूप में झुलसी हुई काँटेदार पौधों को चीरती हुइ पुरे आवरण में लाल गुब्‍बार फैलाती हुई बह रही थी। ऐसे में भी एक मासूम श्‍वेत रंग की छोटी सी घोड़ी अपने नन्‍हें दोस्‍त को क्षितिज में तलाशती हुई गेट पर खड़ी थी।

हर पल, हर क्षण ज़मीन सूर्ख नज़र आती, चारा न जाने कहाँ तक भूख मिटाती, और तो और बाँध भी अपना रूप बदलकर मात्र एक मिट्टी का रिसाव बन चुका था। खारेपन और परजीवियों के अलावा उसमें कुछ न था, जो उसे और भी बीमार कर रहा था।

उस श्‍वेत घोड़ी के बाकी सारे साथी अपने पेट की जलन बुझाने के लिए, गहराईयों में न जाने कितनी दुर तक भटक रहे थे, पर ये श्‍वेत घोड़ी अपने नन्‍ही लड़की के इन्‍तज़ार में कहीं दूर जाने की सोच भी न सकी। उसे ये डर था की शायद दुर जाने पर उस क्षण वो उपस्थित न होगी जब वो लड़की उसकी सवारी करने आएगी।

जब घोड़े के अनुयान ने उसे अपने हाल पर छोड़ दिया था तब उसे रह रहकर उन दोपहरों की यादें आती थी। वह दिन ही कुछ और थे जब वह नन्‍ही लड़की उसके नर्म बालों को सहलाकर चोटियाँ बनाती और प्‍यारे-प्‍यारे लुभावने रिब्‍बनों से सजाती। उसके बाद का दृश्‍य तो और भी सुनहरा था। जब बाकी सभी खुबसूरत घोड़े भी उसके साथ रिंग में सवारी करतीं और तब तलक करतीं जब तक वे शिथिल न हो जातीं परन्‍तु उस रिंग में गुँजती तो केवल अश्‍वों की उल्‍लास से भरी हिनहिनाहट।

जब वह अपने पलकों को बंद करती तो उस छोटी सी लड़की की स्‍मृति आती जो हमेशा उसे मीठे रसीले गाजर देती थी और बड़े लाड से उसके नर्म बालों पर ब्रश फेरा करती थी।

आह, उस नन्‍ही लड़की की कमी कितनी खलती थी।

घोड़ी उसे दिलोजान से प्‍यार करती थी, पर ये बात उसके समझ के परे थी कि उस लड़की ने उसे दुर क्‍यों भेज दिया।

उस लड़की से मिले कई मौसम ढलकर बीत गए, परन्‍तु हर दोपहर जब सुरज अनंत में ढूबने की तैयारी करता , वह श्‍वेत घोड़ी लड़खड़ाते हुए भी गेट पर जरूर पहुँचती। अब वह अपनी क्षीण और दुर्बल काया के साथ बड़े कठिनाई से चल पर रही थी। मगर फिर भी अत्यतं धैर्य के साथ उस नन्‍ही लड़की के आने और उसे घर ले जाने की प्रतिक्षा करती।



अध्‍याय 1

एक लड़की अपने पहले प्‍यार को कभी नहीं भूला पाती। लम्‍बे सुनहरे बाल, गहरी भूरी आँखे और हर बार अस्‍तबल में घुँसते ही उसके सचेत कान जो मेरे कदमों की आहट पर हरकत कर उठते थे। एक दशक तक मुझे हार्वी के सिवा किसी भी दुसरे नर में दिलचस्‍पी ही नहीं हुई। और क्‍यों हो भला, वह बड़े सब्र से दिन ढलने के वक्‍त मेरा इन्‍तज़ार जो करता था। वह मेरी दु:ख भरी दास्‍तान बड़े ही निष्‍पक्ष भाव से सुनता और फिर मुझे अस्‍तबल के बाहर की दुनिया की सैर कराता था। वहाँ मुझे पुरी आज़ादी महसूस होती थी।

जब उस चुड़ैल ने जो खुद को मेरी माँ कहती थी, उसकी हत्‍या की, तब मैं हफ्तों तक रोई और आखिरकार घर से भाग गई। हाँ, ये सच है कि उसने पुलिस को मेरे खिलाफ भड़काया और वे मुझे हवाई अड्डे से घसीटकर वापस घर ले आए। परन्‍तु मैंने भी उसे नहीं छोड़ा। हाँ, मैंने भी ऐसा ही कुछ किया। जिस दिन मैं अठारह साल की हुई और घर से बाहर कदम रखा, उस दिन मैंने अपने पिता को फोन किया और मेरे पालन-पोषण के लिए माँ को दिए जाने वाले आर्थिक सहायता को बंद करने को कहा।

ये उनके लिए सठीक सज़ा थी की मैंने उन्‍हें घर से बेदखल होते हुए देखा। क्‍योंकि उन्‍होंने मेरे हार्वी को उन्‍हे नापसंद करने के लिए मार डाला था।

शायद इसी को कर्मों का फल कहते हैं कि आज मुझे भी अपना घर खोना पड़ रहा था।

मैंने अपने आँसुओं को रोकते हुए, अपने जिन्‍दगी के "दुसरे महान प्‍यार" की मदद की जो मेरे बची-खूची वस्‍तुओं को उस अपार्टमेन्‍ट के बाहर ले जा रहा था जिसमें हम दोनों ने जिन्‍दगी के तीन साल गुज़ारे थे।

जैसे ही मेरे तकिये से भरा हरे रंग के कचरे का बैग उसके लम्‍बी-दुबली का़या से टकराया वह इस भांती गुरगुराया मानों वज़नदार सामान उठा रखा हो।

मैंने किताबों से लदी हुई मज़बूत दफ़ती उठाकर अपने लाल रंग की २००७ फोर्ड फॉल्‍कन के पीछे के सीट पर रख दी और कुछ कदम अलग हट गई ताकी वह उसे डब्‍बों के बीच की जगह में भर दे।

"ये वो सभी वस्‍तुऐं हैं जो तुम इस रिश्‍तें में लेकर आयी थी।" उसने एक लय में बोला। "बाकी सारा सामान मेरा है।"

भूरे बाल और भूरी-आँखें, लम्‍बी और गठीली काया, ये सभी ग्रेगोरी स्‍कलटर जैसे किसी भी वित्त के स्‍नातकोत्‍तर का प्रतिरूप था। परन्‍तु वह मेरे सामान को अपार्टमेन्‍ट से बाहर निकालने में मदद करते हुए आस्‍तीन चढ़ाए कड़क सफेद शर्ट में भद्दा-सा लग रहा था।

हालांकि मेरे बाल लम्‍बे और आँखे अपनी गिटानों दादी जैसी काली थी फिर भी क्‍वींसलैंड विश्‍वविद्यालय के सभी हमें चार साल तक "अनुरूप जोड़ा" कहते थे।

ग्रेगोरी के भूरे जूते दरवाज़े के तरफ ऐसे पड़े हुए थे, मानो वह किसी भी क्षण भयभीत होकर खुदकों उस पुराने फ्लैट के सुरक्षा घेरे में बन्‍द कर लेगें।

"सही कहा, ये सारी मेरी ही चीज़ें हैं," मैंने उसकी आँखों को अपनी काली आँखों से चीरते हुए कहा, "और अब तुम्‍हें मुझसे भी छुटकारा मिल जाएगा।"

जैसे ही मैंने अपने कार के दरवाजे को पटका, ग्रेगोरी पीछे की तरफ दौड़ पड़ा मानो वह भयभीत था कि मैं उसे अभिशाप दें दूँगी या उसके सिर पर कुछ उछाल दूँगी।

"ऐसा मत कहो रोज़ी" ग्रेगोरी ने अपराध बोध से गुँजते हुए स्‍वर में कहा, "तुम तो ऐसा प्रतीत करा रही हो जैसे की मैं कूड़ा-करकट बाहर फेंक रहा हूँ।"

"क्‍या तुम ऐसा नहीं जता रहे हो?" मेरा स्‍वर कड़वाहट से तीक्ष्‍ण हो उठा।

"हम दोनों बहुत भिन्‍न थे रोज़ी," ग्रेगोरी ने कहा, "हमारे बीच कभी कोई मेल था ही नहीं।"

मैंने अपने जबड़ों को भींचकर एक और तर्क-वितर्क से बचने की कोशिश की क्‍योंकि वो मुझे ही रिश्‍ते को खत्‍म करने के लिए दोषी ठहरा देता।

हम अपने विश्‍वविद्यालय के प्रथम वर्ष मिले और द्वितीय वर्ष परिसर के बाहर रहने लगे। अगले तीन वर्ष तक मैंने किराया भरने के लिए पढ़ाई के साथ-साथ काम भी किया जब की ग्रेगोरी पढ़ाई करता रहा ताकी वह विशिष्‍टता से स्‍नातक उत्‍तीर्ण सके।

हमारा स्‍वप्न-सा विवाह नये साल के पश्‍चात होने वाला था। पर जब उसे नौकरी का प्रस्‍ताव आया, उस नीच इंसान ने मुझसे सगाई की अँगूठी वापस देने को कहा और हमारे अपार्टमेन्ट के पट्टे को भी खत्‍म कर दिया।

"ठीक है" मैंने कार की चाबी ढूंढते हुऐ अपने आँसुओं से संघर्ष की।

"तुम्‍हें दोबारा मेरी शक्‍ल देखनी की जरूरत नहीं पढ़ेगी।"

"ऐसा मत कहो रोज़ी" ग्रेगोरी का स्‍वर अनुरोध करने की उच्‍च सीमा तक बढ़ा, "क्‍या हम दोस्‍त नहीं रह सकते?"

मैंने उसकी नज़रों से नज़र मिलाई। ग्रेगोरी की भूरी आँखें चोरी-चोरी लपक कर अपार्टमेन्‍ट के तरफ जा रही थी, जो की बस खाली होने वाली थी क्‍योंकि वो माल वाहक वैन उसके सामान को सिडनी के एक आलीशान बंगले में ले जा रही थी जिसके लिए उसने अपने नए प्रेमिका से पहली किश्‍त छल से दिलवायी थी ।

"नहीं," मैने ठोड़ी उठाकर कहा, "तुम एक रक्‍तपीपासु शोषक हो, ग्रेग। और अब मैं इस्‍तेमाल होते-होते थक चुकी हूँ।"

आभास होने का वो हुनर जो मुझे मेरे गिटानों दादी से विरासत में मिली थी, मेरे अन्‍दर लहरें उत्‍पन्‍न करने लगी जब मैंने ये महसूस किया की उस खून पीने वाले घटिया आदमी से जो मेरा थोड़ा बहुत ताल्लुक था वह खत्‍म होने वाला था । मैं धपाक से अपने फॉल्‍कन के सीट पर बैठी, चाबी घुमाई और सीट बेल्‍ट लगाने से पूर्व ही मैंने गाड़ी को गियर में डाल दिया। पहिये चीं-चीं कर उठे और ग्रेगोरी चीख उठा।

बहुत बढ़िया! काश की मैं इस चोर के पैरो पर गाड़ी चढ़ा देती। मेरी V6 एक ताकतवर गाड़ी के भांति तसल्‍ली से घूमी जैसे ही मैंने रफ्तार से ब्रिस्‍बेन को छोड़ा और A2 के तरफ बढ़ने लगी। जैसे ही मैंने रफ्तार से ब्रिस्‍बेन को छोड़ा मेरी V6 एक ताकतवार गाड़ी के भांति तसल्‍ली से घूमी और A2 के तरफ बढ़ने लगी।

मेरी गाड़ी की मज़बूती का अनुभव अवास्‍तविक था, ये सिर्फ ध्‍वनि कम करने के यंत्र को शीघ्र बदलने का लक्षण मात्र था, फिर भी वो मज़बूत लग रहा था और मुझे उसके ताक़त के हर कतरे की जरूरत थी।

"बदतमीज़!" मैने खुल हाइवे पर चिल्‍लाया, "उम्‍मीद करती हूँ की कोई तुम्‍हारे साथ भी बिल्‍कुल ऐसा ही कुछ करे।"

मैं अप्रत्‍यक्ष कार चलाती रही जब तक शहरों की प्राकृतिक छटा क्षितिज से क्षितिज तक फैली हुए भूरे पीले रंग के चरागाह रूपी लहरों में न बदल गई। ये घास ग्रीष्‍म काल के प्रारंभ के सूर्य की किरणों से शुष्‍क होकर एक सौम्‍य सुनहरे रंग में बदल चुके थे जो मुझे हार्वी के बालों की याद दिला रहे थे। धीरे-धीरे मेरे आँसु भी रूक गए।

ये अश्‍व प्रदेश था। यह बिल्‍कुल ऐसी जगह थी जैसा मैंने बड़े होते हुए बसने की कल्‍पना की थी। ये ऐसी जगह थी, जहाँ हार्वी किसी ओछें काल्‍पनिक व अधिक कीमत वाले घुड़सवारी के विद्यालय के बाढ़े में खड़ा न होकर चरणभूमि में स्‍वछंद दौड़ लगा सकता था।

एक जानी-पहचानी सी तड़प मेरे उदर में घुमने लगी। "गर ख्‍वाईशें तुरग होतीं", मैं खुद में बङ-बड़ाई। छह साल बीत चुके थे, लेकिन कुछ दर्द ऐसे होते हैं जो कभी नहीं मिटते।

मैंने रेडियो ऑन किया जहाँ आस्‍ट्रेलिया के 40 सव्रश्रेष्‍ठ कलाकारों द्वारा युवतियों से लेकर स्‍तन तक और तो और विश्‍वासघात पर भी गाने पेश किए जा रहे थे। मैडन ब्रदर्स नाम के पॉप रॉकबैन्‍ड भी अपने बकवास विज्ञापन वाले गीत के साथ आये, और थोड़ी देर के पश्‍चात, मेरे गुस्‍से के बावजूद मेरी उँगलियाँ "वी आर डन ऑन द वील" नाम के गाने के लय पर थिरकने लगीं।

जैसे ही मेरे पेटोल टंकी की लाइट झिलमिलाने लगी। मैंने नज़दीकी निकास के तरफ गाड़ी मोड़ी और तभी मुझे एक सर्वो पेट्रोल पम्‍प दिखा जो मुझे एक सर्वो हाइवे से ज्‍यादा दूर न था। शौचालय के शीघ्र दौरे के बाद मैं कतार में पैसे देने के लिए खडी हुई और काउंटर के आगे रखे हुए अखबार के स्‍टैंड में सुर्खियाँ जाँचने लगी।

---शुष्‍क तटवर्ती स्‍थानों में अकाल के कारण तबाही----------

उसके पास ही एक पूरे रंगीन पृष्‍ट पर सुनहरे बालों वाली एक सुंदर युवती और उसके ऊँचे दर्जे़ के तलाक का नया अध्‍याय सारे प्रथम पृष्‍ठ पर चिपका हुआ था।

----------तेल के खदानों की वारिस ने वैनेज़ुएलन अरबपति के साथ उड़ान भरी---------

मेरी आँखें अख़बारों को पार करते हुए, हॉट डॉग घुमाते यंत्र तरफ मुड़ गई । 5 डालर में दो हॉट डॉग, चिप्‍स का एक पैकेट और बुदबुदानेवाली ड्रींक मिल रही थी। जैसे-जैसे मैं उन छोटे से भूरे रहस्‍यमय मांस की नलियों को सुनहरे और रसीले रूप में बदलते देख रही थी, वैसे-वैसे मेरे अन्‍दर पैसे खर्च करने की बहस छिड़ गई।

उस बहस के दौरान मैं लगभग उस नर्म सफेद ब्रेड के साथ पीले मस्‍टर्ड सॉस और सिरके वाली गोभी में मिश्रित करारे सॉसेज के टुकडों का स्‍वाद ले पा रही थी, परन्‍तु जब तक मुझे नौकरी नहीं मिल जाती मैं एक आम संघर्ष करने वाली युवती थी जिसके पास बहुत सारे वक्‍त तो था। परन्‍तु पर्याप्‍त पैसे न थे। इससे अच्‍छा तो ये था की मैं कार के पहली सीट पर फेंके ब्रेड व सब्जियों से बने जैम को ही खा लेती।

मैंने काउन्‍टर के पीछे खड़े छोटे लड़के से प्रोफेसर डींगल द्वारा कागज़ के टुकङे पर लिखे हुए पते की दिशा पूछी। मुझे ये पता चला की टुवूम्‍बा यहाँ से आधे घंटे की दुरी पर है और उसके आगे के रास्‍ते के बारे में बच्‍चे को संदेह था। मैं कमरे से बाहर जाने के लिए पीछे मुड़ी और फॉल्‍कन में पेट्रोल भरने के लिए बढ़ी।

ठीक उसी वक्‍त एक प्राचीन ब्‍यूक कार मुखालिफ पम्‍प पर आकर रूकी, यह उस श्रेणी की कार थी जो "क्‍लासिक कार नाइट" [1] में दिखतीं है। उस कार में से एक वयस्‍क औरत निकली और भुगतान करने के लिए अंदर चली गई।उसके उजले-नीले से बाल और गहरे गुलाबी रंग की लिपस्टिक, नारंगी पोशाक के साथ जम नहीं रहे थे। उनके समान वयस्‍क उनके पति बाहर निकले तथा पेट्रोल के ढक्‍कन को खोलकर अंदर वाले बच्‍चे द्वारा पम्‍प चलाने का इन्‍तज़ार करने लगे। उन्‍होंने मुझे एक अजीब-सी डरावनी मुस्‍कान दी।

"आप का दिन शुभ हो, मिस," उन्‍हानें कहा। "तुम्‍हें यहाँ पहले तो कभी नहीं देखा?"

"मैं यहाँ से बस गुज़र ही रही थी।"

जैसे ही संख्‍या 60 डालर तक बढ़ गई वैसे ही मैंने पेट्रोल पम्‍प को ताकने का ढोंग किया, ये मेरे पास बचे हुए पैसों का आधा हिस्‍सा था। अगर मैं ये नौकरी हासील न कर पाई, तो मेरी एक-एक कौड़ी साक्षात्‍कार के लिए गाड़ी दौड़ाने में ही निकल जाएगी।

"क्‍या तुम घोड़ो की नीलामी के तरफ जा रही हो?" उस वृद्ध ने पुछा।

"घोड़ों की नीलामी?" मेरे अंदर के घुड़सवार में एक अजीब सी उत्‍तेजना उत्‍पन्‍न हो गई।

उस वयस्‍क आदमी ने ज़मीन पर गढ़े एक लाल गत्‍ते के सूचक के तरफ इशारा किया जिसमें नीचे की ओर मुड़ी एक तीर छोटी-सी सड़क की ओर इशारा कर रही थी। उसमें निर्दिष्‍ट था, "लॉकयर घोड़े तथा ज़ीनसाज़ी की नीलामी। अगली निलामी: 1 नवम्‍बर"

"वे हर महिने की पहली शानिवार को नीलामी रखते थे," वृद्ध ने बोला, "किन्‍तु हाल फिलहाल अकाल से पीङित पशुधन को स्‍थान परिवर्तित करने के लिए उन्‍हें ये कार्यक्रम हर हफ्ते रखना पड़ता हैं। ज्‍य़ादातर लोग हाईवे से हटकर नीलामी के स्‍थान की खोज करने आते हैं।"

मैंने अपने पॉकेट में दबाए एक कागज़ के टूकड़े को खींचकर बाहर निकाला। ये वही कागज़ था जो प्रतिभाशाली बच्‍चों के मनोविज्ञान के पूर्व प्राध्‍यापक, प्रोफेसर डींगल ने मुझे तब दिया था जब मैंने उनके कार्यालय में हताश होकर ये बताया की मेरे पास रहने के लिए कोई जगह नहीं है।

"मेरे नाट्यून के समीप डार्लिंग डाउन्‍स में नौकरी के लिए साक्षात्‍कार है।"

मैंने उस पर्चे को उनके सामने लहराया।

"नाट्यून?" उस वयस्‍क आदमी की भौहें आश्‍चर्य से सिकुड़ गई। "ये तो उस ओर कहीं दूर बसा हुआ है "

"बिल्‍कुल।"

जैसे पेट्रोल पम्‍प की मशीन संख्‍याओं को कटकटा रहा था हम नि:शब्‍द खड़े थे। उनकी पत्‍नी पैर घसीटते हुए निकली। उन्‍होंने अपना विशाल सफेद पर्स बाह में दबा रखा था। उन्‍होंने मुझे उस आंकने वाली दृष्टि से देखा जो हर औरत उस वक्‍त देती है जब उनके पति किसी नवयुवती से गप्‍पे लड़ाते हुए दिखते हैं।

"ये घोड़ों के नीलामी पर जा रही है?" पत्‍नी ने पूछा।

"नहीं," उस वृद्ध ने कहा, "ये नाट्यून जा रही है। वहाँ इसका नौकरी के लिए साक्षात्‍कार है।"

"नाट्यून?" वह वयस्‍क महिला ने फुफकार कर कहा, "वहाँ तो मुरझाऐ हुए खेतों के सिवा कुछ भी नहीं है।" अकाल ने सब कूछ नष्‍ट कर रखा है। कृषक वहाँ अपने निःसहाय पशुधन को भूखा मरने से पहले बचने के लिए आते रहते हैं। परन्‍तु पशुधन इतनी अधिक संख्‍या में होने के कारण बेचारे आखिरकार: कसाईखाने में पहूँच जाते हैं। नाट्यून के फार्म में तो कोई भी नौकरी मिलने की संभावना नहीं हैं।"

उनके शब्‍द कठोर जरूर प्रतीत हो रहे थे परन्‍तु उनकी नीली आँखें चिंता से भर उठी जब उन्‍होंने मेरे कार के पीछे की सीट पर रखे मेरे सामान को देखा।

" मुझे एक बच्‍चे की देख-भाल करनी होगी," मैंने बताया। "इस नौकरी में कमरा एवं भोजन की व्‍यवस्‍था सम्‍मलित है।"

"अच्‍छा! मैं उम्‍मीद करती हूँ ऐसा हो।" उस वृद्ध महिला ने कहा, "क्‍योंकि उस क्षेत्र में होटल के नाम पे बहुत कुछ नहीं है। गेहूँ और गायों के अलावा वहाँ कुछ भी नहीं है।"

उस दम्‍पति ने A2 में वापस मुड़ने के लिए रास्‍ता बताया ताकी मुझे भटककर इस जगह वापस न आना पङे। जैसे ही मैंने गाड़ी निकाली, मेरा ध्‍यान लाल और श्‍वेत संकेत पर गया जिसपे लिखा था "लाक्‍येर अश्‍व एवं जेनशासी की नीलामी।"

एक ज़माने में ------ नहीं। मैंने उस महत्‍वाकांक्षी विचार को मस्तिष्‍क से बाहर ठेल दिया।

सबसे पहले मुझे एक नौकरी की तलाश करनी होगी और फिर मुझे कुछ पैसों की बचत करके एक नया मकान लेना होगा क्‍योंकि मेरी माँ के साथ रहने का विकल्‍प तो था ही नहीं, और मेरे पिता स्‍पेन तब चले गए थे जब मैं सोलह साल की थी।

मैं टुबुम्‍बा पहूँची ठीक-ठीक वैसे ही जैसे उस बालक ने वादा किया था और फिर आस्‍ट्रेयलयन हाईवे नं 39 पर दक्षिणी-पश्चिमी दिशा की ओर अग्रसर हो गई। हाईवे सिकुड़कर दो-लेन पथ में तबदील हो गई और प्राकृतिक छवि सपाट एवं निश्चित रूप से शुष्‍क हो उठी। एक समय तो मैंने एअर कंडीशनर तक चला दिया हांलाकी बाहर इतनी गर्मी थी की ज्‍यादा फर्क न पड़ा। प्रकृति के छटा ने आश्‍वस्‍त एकरूपता बनाए रखी थी। केवल मटमैले रंग की हल्‍की सी भिन्‍नता इस बात की सूचक थी कि गेहूँ के असीम खेत, जौ और जवार के खेतों में परिवर्तीत हो चुके थे। यहाँ तक की मेरे अप्रशिक्षित आँखों के लिए इस उपजाऊ मौसम के प्रारंभ में भी फ़सल अत्‍यंत शुष्‍क लग रहे थे।

आखिरकार मैं अपने दिए गए पते के आखिरी पढ़ाव तक पहुँच गई। मैं एक बेहद संकरे मार्ग पर मूड़ी जो कई किलोमीटर तक फैले कम घने, छोटे कद वाले पेड़ों के बीच की सीधी रेखा को चीरती हुई गुज़र रही थी, हालांकि कभी-कभी मेरी दांयी ओर पानी की झलक दिख रही थी। मैं तब तक गाड़ी चलाती रही जब तक मुझे वह कच्‍ची सड़क न दिखी जो मेरी मंजिल तक मुझे पहूँचाने वाली थी।

एक छोटे से लकड़ी के पट्टे पर लिखा था, "कोन्‍डामाईन नदी पशु-फार्म।"

उसके नीचे एक कागज़ के विज्ञापन का तख्ता जुङा हुआ था जिसमें बड़े-बड़े जामुनी रंग के अक्षरों में लिखा था "—रोज़ामोंड तुम्‍हारा स्‍वागत है—"

उस चिन्‍ह के एक तरफ गुलाबी चमकीला एक सिंगा जानवर चित्रित था एवं दुसरी ओर एक परी द्वारा संरक्षित सोने के पात्र में लुप्‍त होता टेढा-मेढ़ा सा इन्‍द्रधनुष शोभा बढ़ा रहा था। मैं अपने कार से बाहर निकली। मेरे गले में एक गाँठ सी बनने लगी जब मैंने नीचे लिखे हुए बचकानी, अस्‍पष्‍ठ पाठ को पढ़ा जिसमें लाठी रूपी कुत्‍ते की आकृति के साथ लिखा था, "थन्‍डरलेन [2] से मत डरना"

मुझे पता था उस नन्‍ही लड़की का नाम पीपा था। उसके माता-पिता का हाल ही में तलाक होने वाला था, और वह अपने पिता के साथ रहती थी जो की व्‍यापार के सिलसिले में अकसर सफ़र करते थे। इसके अतिरिक्‍त मुझे बाकी की जानकारी वहाँ पहुँचकर ही हासिल होने वाली थी।

मैंने अपना मोबाइल फोन निकालकर उस चिन्‍ह की तस्‍वीर खींच ली। मोबा नेटवर्क का केवल एक डंडा था, अपने मित्रों को अपलोड करने के लिए प्रयाप्‍त रिसेप्‍शन भी न था, इसलिए मैंने "सेव" दबा दिया।

मेरे पिता के स्‍पेन जाने के बाद किसी ने भी मुझे अभिवादन महसूस कराने के लिए इतनी फिक्र नहीं की थी। शायद ये नौकरीनुमा फिरकी इतनी भी बुरी नहीं होगी?

जैसे ही मैंने उद्विग्न होकर पशुओं के बाङे की जाली के ऊपर एतियात से गाड़ी चलाई, वह थरथराने लगी। एक लम्‍बी कच्‍ची सड़क आच्‍छादित खेतों से घुमाकर निकल रही थी किन्‍तु सभी जगहों से भिन्‍न, वहाँ कोई गाय भी नज़र नहीं आ रही थी। आखिरकार एक विशाल सफेद अनाजघर का उभरा हुआ मध्‍य छज्‍जा दिखाई देने लगा। चारागाह की तरफ रूख करता उसका द्वार इतना विस्‍तृत था की दो-दो गाङियाँ साथ-साथ चलाई जा सकती थी।

आंगन के उस पार एक साधारण पीला फार्म शैली में बना घर था जो कि सफाई से कटे हुए मुरझाए कुम्‍हलाये घास, खिड़ली पर रखे खाली गमलें और अधिक बढ़े हुए बाड़ से घिरा हुआ था। जैसे ही मैं उस संकीर्ण गेट के बीचों बीच चलने लगी ,एक काला भूरा आस्‍ट्रेलियन कुत्‍ता दौड़कर बाहर आया और भौंकने लगा।

" तुम ज़रूर थन्‍डरलेन हो?"

मैंने एक जीर्ण-शीर्ण पुराने उपयोग में लाए जाने वाले अपनी गाड़ी रोकी जो की एक मटमैले आवरण से ढके हुए स्‍पोर्टस कार के पास खड़ी थी।

"हैलो, प्‍यारे से पप्‍पी," जैसे ही मैं अपने कार से निकली मैंने उस कुत्‍ते को आश्‍वस्‍त किया। मैंने अपने हाथ आगे की ओर बढ़ाया ताकी वो उसे सूँघ सके । वह कुत्‍ता मेरे पैरों पर कुलबुलाने लगा और फिर वापस घर की तरफ भागा। वह भौंकने लगा ताकी घर के निवासी बाहर आऐं और देखें।

दरवाजा खुला एवं एक सफेद-सुनहरे बालों की चोटी वाली नन्‍हीं सी लड़की छलाँग मारती व छोटे बच्‍चे जैसे जोश के साथ हाथ हिलाती हुई दरवाज़े से निकली ।

"वह यहाँ है! डैडी! वह पहूँच गई!"

वह गुलाबी रंग के कपड़े पहने हुए थी। गुलाबी छोटी- पतलून और फीका गुलाबी कमीज़ जिसके सामने "मेरी नन्‍हीं छोटी अश्‍व" नाम के कार्टून का पोस्‍टर चिपका था। ये वह पोशाक था जो नगर परिसर के बच्‍चे पहने हुए दिखते थे।

"तुम ज़रूर रोज़ामोन्‍ड हो!"

"वो में ही हूँ," मुझे मुस्‍काना सहज लगा "और तुम ज़रूर पीपा हो।"

"क्‍या आपने सूचक देखा?" पीपा मेरे सामने एक स्‍टाप पर आकर रूकी।

"मैंने देखा, शुक्रिया। तुमने मुझे अभिवादन महसूस कराया।"

वह नन्‍ही लङकी मुस्‍काई। मैंने गौर किया की उसकी अनोखी भूरी आँखें इतनी फीकी थी कि वह सूर्य के रोशनी में चाँदी सी चमचमाने लगी।

"डैडी को डर था कि कोई भी इतनी दुर इस क्षेत्र में नहीं आ पाएगा, इसीलिए मैंने सोचा की अगर में एक सूचक बनाऊँ तो शायद आप रहना चाहोगे।"

मेरे गले में ब्रिस्‍बेन से बैठा वह गाँठ थोड़ा सा हल्‍का हुआ।

"ये मेरे ऊपर निर्भर नहीं है। ये तुम्‍हारे पिता पर निर्भर हैं।"

पीपा के पिता ने सामने वाले बरामदे में कदम रखा और हमारी ओर बढ़ने लगे, वे सादे चुस्‍त नीले डेनीम पहने हुए थे जो कि उनके लम्‍बे डग को अधिक उभार रहा था। उन्‍होंने छोटे आस्‍तीन वाली पट्टेदार कमीज पहन रखी थी जो क्‍वीन्‍सलैंड के इस भाग के स्‍थानाधिपतियों की विशिष्‍ट पोशाक होती है, किन्‍तु वह डिज़ाइनसाज़ कट वाली थी न की आम डिपार्टमेन्‍टल शाखा से खरीदी हुई।

वे लगभग दो मीटर लम्‍बाई, सुनहरे-भूरे बालों युक्‍त चौड़े कन्‍धे तथा प्रतापी मुखाकृती लिए खङे थे।

ये सभी विशेषताएँ प्रभावशाली रूप से आकर्षक होते अगर उनके चहरे पर चिंता की चुभन न होती। उन्‍होंने लम्‍बा डग बढ़ाते हुए अपना हाथ आगे की ओर किया।

"मिस ज़ालबडोरा?"

जैसे ही उनकी उँगलियाँ मेरे उँगलियों के साथ जुड़ी मेरा हाथ सिहर उठा। मैंने नज़र उठाकर अत्‍यन्‍त ही खुबसूरत आँखों के तरफ देखा। ऐसी उत्‍कृष्‍ठ आँखें मैंने पहले कभी न देखी थी। उनकी गहरी आँखों की पुतलियों के चारो ओर नीले-हरे रंग की प्रभामंडल इस प्रकार छाई हुई थी जैसे भव्‍य बैरियर रीफ़ के इर्द-गिर्द का समुद्र।

मैंने उनके उम्र का अनुमान लगाने की चेष्‍ठा की और मेरे से लगभग दस साल ज्‍यादा ही रखा।

"जी, मैं ही रोज़ामोन्‍ड हूँ" मैंने कहा।

"पर, ज्‍यादातर लोग मुझे रोज़ी कहते हैं।"

शब्‍दों को लड़खडा़ने से रोकने के लिए मैं बस इतना ही कह पा रही थी। लानत है। मात्र चार घंटे पहले मैं ग्रेगोरी के लिए दिल चीर कर रो रही थी।

किसी कारणवश, मैंने पीपा के पिता को अग्रज मान लिया।

"मैं एडम हूँ, एडम ब्रिस्‍टोह।"

जैसे ही उन्‍होंने कार के अन्‍दर सतह से छत तक भरे हुए मेरे समस्‍त नीजी वस्‍तुओं को झांक कर देखा उनका एक सुनहरा भौं ऊपर की ओर उठ गया।

"क्या आपके सामान को उठाने में आपको किसी की मदद चाहिए?"

मेरे गाल शर्मिंदगी से गुलाबी हो उठे। यह मुझे सूझा ही नहीं था कि मेरे संभावनीय नियोक्‍ता मुझे नौकरी पर रखने के फैसले से पूर्व मेरी कार को देखेंगे।

"मैंने सोचा था यह एक प्रारंभिक साक्षात्‍कार होगा?" एडम भौंहें चढ़ाकर बोला।

"रोबर्टा डिंगल मेरी पत्‍न--------- मेरी पूर्व पत्‍नी के गहरी मित्र है। उन्‍होंने ये साक्षात्‍कार तय किया है। मैंने नहीं।" एडम का स्‍वर गुस्‍से के थरथराया ।

"मेरी पत्‍नी गर्मियों में पीपा को ले जाने वाली थी और फिर उसने इनकार कर दिया।"

"ये जानते हुए की मैंने वर्रे के घोंसले में कदम रख दिया है फिर भी मैंने कहा, "ओह" "मिस डिंगल ने दक्ष्रिणी अफ्रीका में अटके एक माता के समबंध में कुछ जिक्र तो किया था।"

"---मैं किसके लिए काम करूँगी? आपके या आपके पूर्व पत्‍नी के लिए?"

एडम ने अपनी कनपटियों को ऐसे निचोड़ा जैसे की उसका सर किसी भी वक्‍त गुस्‍सें से फट सकता है।

मेरे लिए, वह कड़वाहट के साथ बोला, "हमेशा यह सब अंत में मेरे ऊपर ही आता है।"

मैंने अचरज से अपने कार के तरफ मुड़कर देखा, कि जिस चीज़ में मैं इच्‍छा से कदम रख रही हूँ कहीं वो साँप का बिल तो नहीं। मेरे लिए ब्रिस्‍बेन में कुछ भी न रखा था, और मैंने मजबुरी में भी अपनी माँ के पास जाने से इनकार कर दिया था।

मुमकिन है सीएन की मम्‍मी कुछ हफ्तों के लिए मुझे रख ले, कम-से-कम जब तक मैं एक नौकरी न ढूँढ लूँ?

इसी सोच के बीच एक छोटा-सा हाथ मेरे हाथों में फिसला।

"कृपया रूक जाइये?" पीपा की बड़ी-बड़ी चाँदी सी आँखें चिंता से मलिन हो गई। "श्रीमति हेसटींग्स ने आपके लिए कुछ केक भिजवाया था यह सोचकर की शायद आप अपने सफर के कारण भूखी होंगी। क्‍या आप केक के साथ चाय पसंद करेंगी?"

जो कुछ भी उनका अपने पूर्व पत्‍नी से बैर था, इसके बावजूद भी अपने बच्‍ची के कष्‍ठ को देखते ही एडम ब्रिस्‍टोह के हाव-भाव नर्म पड़ गए। वे मुझसे नाराज़ नहीं थे। वह क्रोधित थे क्‍योंकि उस बेचारी सी बच्‍ची के माँ ने उसकी अवहेलना की थी तथा उसकी पुरी जिम्‍मेदारी एडम पे डाल दी थी।

मुझे गेट पर लगा हुआ स्‍वागत चिन्‍ह याद आ गया। मेरा ये अनुमान है की पीपा अकेले ही मवेशियों की जाली के ऊपर से चलकर गई होगी। मुझे नौकरी की जरूरत थी। उस नन्‍ही लड़की को देख-भाल की जरूरत थी। और एडम बिस्‍टोह? उसे क्‍या चाहिए था?

"अच्‍छा तो इससे पहले की आप अपने नन्‍ही सी लड़की को मुझे सौंप दे आपको मेरे बारे में और जानने की इच्‍छा हो रही होगी?"

यह सुनते ही एडम ने एक चौकन्‍ना हाव-भाव धारण कर लिया।

"मेरे कुछ सवाल तो हैं ही," उन्‍होंने बोला, "अगर आप बुरा न माने तो?"

"बिल्‍कुल।" मैंने पीपा का हाथ पकड़े हुए एडम से कहा। "लेकिन सबसे पहले मैं चाय पीना पसंद करूँगी। और फिर मुझे अपके डैडी से कुछ चीजों के बारे में चर्चा करने की जरूरत है।" रोज़ी ने पीपा की ओर देखते हुए कहा।

पीपा खुशी से उछलते हुए घर के अंदर चली गई। वह कुत्‍ता भी उसके पीछे-पीछे भागा, उसकी पूंछ इस तरह हिल रही थी मानों रोयेंदार काला हवाई जहाज़ का पंखा हो।

मैंने अपने बटुए को कार की पहली सीट से ढूँढ कर बाहर निकाला और मेरे बाकी सारे सांसारिक सम्‍पतियों को पीछे छोड़ दिया। ऐसा कतई न था कि मुझे मायुस होने का ढोंग करना पड़े क्‍योंकि मेरे पास अपना आश्रय नहीं था।

घर के आंतरिक भाग में कदम रखकर लगा जैसे 1970 के दशक के हास्‍यमय परिस्थिति में पहुँच गई हूँ।

वह जगह गहरे चौखटे से युक्‍त था एवं मध्‍यशताब्‍दी के आधुनिक असबाब से भरा हुआ था जो इतने पुराने थे की फैशन से परे होकर भी वापस आ गए थे। अगर कुछ अतिरिक्‍त था तो गेरूआ-नारंगी रंग की सजावट। पीपा मुझे खींचकर एक टुटे-फुटे लकड़ी के हत्‍थे वाले गदे्दार कुरसी तक ले गई और स्‍वयं छपाक से मेल खाते नारंगी पलंग पर कुत्‍ते को अपने साथ न कूदने का इशारा करते हुए बैठ गई। एक चाय का सेट बड़े मेहनत से कॉफी टेबल पर छोटे चितकबरे मेज़पोश एवं मिलान के नेपकीन के साथ सजाया गया था। परन्‍तु अभी भी उसमें चाय नहीं भरी गई थी। मैं उस कुर्सी में धंस गई जो आकर्षक से कहीं ज्‍यादा आरामदायक थी। एडम ने रसोईघर में कदम रखा और फिर चाय की केतली एवं केक से भरी ट्रे से साथ बाहर आए।

"श्रीमति हेसटिगंस मुझे पीपा का ख्‍याल रखने में सहायता करती हैं," एडम ने कहा।

"किन्‍तु वह बहत्‍तर साल की वृद्धा है। पिछले हफ्ते वह गिर गई थी और उनकी कमर पर चोट भी लगी थी।"

मैंने चारों तरफ उत्‍सुक होकर नज़रें दौङाई कि कोई और भी यहाँ रहता होगा। पीपा ट्रे से केक झपटने के लिए उछल पड़ी।

"वे सड़क के उस पार वाले स्‍थान में रहती हैं," पीपा बोली। "जब पिताजी व्‍यापार के लिए बाहर जाते हैं, तब मैं कभी-कभी वहाँ सोने चली जाती हूँ। उन्‍होंने डैडी की भी देखभाल की थी जब वह छोटे थे।" उसका स्‍वर धीमा हो गया। "ये सब दादी माँ के मृत्‍यु के पहले होता था।"

एडम ने अपना गला साफ किया।

"मेरी माँ तीन हफ्ते पहले ही स्‍तन के केंसर से गुजर गई। हम यहाँ उनके रियासत की देखभाल करने आए थे, किन्‍तु पीपा को यहाँ अच्‍छा लगने लगा है और यह जगह मेरी नौकरी के स्‍थान से सफर करने योग्‍य भी है। श्रीमति हेसटिंग्‍स ने पीपा के प्रति लापरवाही न होने में मेरी सहायता भी की है।"

"प्रोफेसर डिंगल ने ज्रीक किया था कि आप बहुत यात्रा करते हैं," मैंने पुछा। "आप क्‍या व्‍यवसाय करते है?"

"मैं शेल पत्‍थरों से प्राकृतिक गैस एवं तेल निचोड़ने के लिए आंकन करता हूँ।"

"फ्रेकींग?" [3]

"पुरे तौर से नहीं," एडम ने भौं चढाये, उनके हाव-भाव चिंताशील थे। " ये कोयले की तह की गैस है पुरे क्‍वींसलैंड में इसके कई सारे खंड हैं। किन्‍तु हाँ, मेरे अनुमान से मेरा कार्य कुछ हद तक इस विषय के अतंर्गत ही आता है ।"

मेरे पर्यावरण के हिमायती साथियों ने बताया था की कैसे खनिज ईंधन निचोड़ते वक्‍त हमारी धरती को नुकसान पहुँचाया जाता है।उनकी बातों को न दोहराकर मैंने जुबान पर लगाम लगा लिया।

आखरी बार जब मैंने जाँचा था, तब कोई तेल की परी आसमाँ से उतरकर मेरे पेट्रोल की टंकी को भरने नहीं आई थी। तिरपाल के नीचे सुरक्षित रखी हुई कीमती स्‍पोट्रर्स कार की भी यही विडम्‍बना होगी।

"तो तुम्‍हारा कहीं और भी घर है?" एडम ने पुछा।

उन्‍होंने नज़र फिराई "इन गर्मीयों के दौरान मुझे पीपा के देख-रेख के विषय पर निर्णय लेना होगा। पहले, मैंने आशा किया था—।"

वह चुप हो गए और उनकी तरासी हुई मुखाकृति क्रोध, दु:ख एवं अविश्वास के मिश्रित भाव से भर उठी । ये बिल्‍कुल वहीं भावाभिव्‍यक्ति थी जो मैंने तब धारण कर रखी थी जब ग्रेगोरी ने कहा था की वह मुझसे शादी नहीं करना चाहता।

"डैडी ने कहा था कि अगर हम यहाँ रहेंगे, तो शायद मुझे एक घोड़ा मिल सकता है।" पीपा की आँखें उम्‍मीद में चमकने लगी।

"जब हमने पर्याप्‍त बचत कर ली होगी, तब वे मुझे एक घोङी खरीदने के लिए ले

जाएंगे ।"

"क्‍या तुम घुङसवारी करती हो?"

"थोड़ा सा। पिछली गर्मी में मेरी मम्‍मी ने मुझे एक घुड़सवारी वाली शिविर में भेजा था।"

एडम की मुखाकृति कठोर होकर अस्‍पष्‍ठ भावाव्‍यक्ति में बदल गई। उसके साक्षात्‍कार को प्रारंभ करने का मैंने प्रतीक्षा किया, किन्‍तु उसकी तीक्ष्‍ण, बाज़-सी आँखें मेरा उसकी बेटी के साथ बातचीत के तरीके को गौर कर रही थी, जब वो मुझे चाय परोस रही थी। मैंने निश्‍चय किया की शायद यही अच्‍छा होगा की मैं सवाल पूछ लूँ।

"मैं समझती हूँ की पीपा के पढ़ाई में कुछ क्षति हुई है?"

"हाँ," एडम ने कहा। "पिछले एक साल से पीपा घर से ही पढ़ रही है, परन्‍तु मैं उम्‍मीद करता हूँ की आने वाले शरद श्रतु तक उसका नामांकन विद्यालय में हो जाएगा। मैं तुम्हारा आभारी रहूँगा अगर तुम उसे नामांकन के लिए तैयार कर दोगी।"

"इसी कार्य के लिए में प्रशिक्षित हूँ," मैंने कहा।

"और कौन से अन्‍य कार्य करने की आप मुझसे उम्‍मीद रखते हैं?"

एडम ने अपनी चाय की चुस्‍की लगाई। वह चीनी मिट्टी के चाय की प्‍याली उनके विशाल हाथों में हास्‍यास्पद ढंग से लघु एवं नाजुक दिख रही थी।

"मेरे निरीक्षण में कई जांच के कुएँ दिन भर के ड्राइव के अंदर ही है, इसी वजह से मैं पीपा को गर्मियों में यहाँ रखना चाहता हूँ, परन्‍तु बाकी कुएँ आस्‍ट्रेलिया के तटीय क्षेत्र के सूरत जल कुंड में स्थित है। मैंने उनकी परीक्षण रोक दी थी यह सोचकर की जब पीपा अपनी माँ के साथ गर्मियाँ बिताने जाएगी तब मैं उन सभी कुओं का एक साथ जाँच कर लूँगा, परन्‍तु मैं उन्‍हें रहनुमाई के बिना अब और नहीं छोड़ सकता। अगर मैं ऐसा करता हूँ, तो शायद मैं नौकरी से हाथ धो बैठूँगा।"

"आपको कब जाना है?"

"आस्‍ट्रेलिया के तटीय क्षेत्र में मेरा पहला दौरा परसों शुरू होगा," एडम ने कहा। "जनवरी के अंत तक ज्‍यादातर समय में आता और जाता रहूँगा।"

"इसलिए अपको जानने के लिए मुझे बहूत कम ही समय मिला है।" एडम विरक्ति से फुफकार उठा।

"रोबर्टा डिंगल ने कल मुझे कॉल किया तथा मुझे आश्‍वस्‍त किया की आप जैसा अत्‍यन्‍त परीश्रमी छात्रा उन्‍होंने पहले कभी नहीं देखा। उन्‍होंने बताया की आप एक उत्‍कृष्‍ठ अध्‍यापिका हैं और मेधावी एवं संवेदनशील बच्‍चों के प्रति विशेष रूझान रखती हैं।"

मेहनती तो ठीक है, किन्‍तु मुझे उत्‍कृष्‍ठ अध्‍यापिका कहना थोड़ा ज्‍यादा ही हो गया था।मेरे कार्य में व्‍यस्‍त हो जाने के कारण प्रोफेसर डिंगल ने स्‍नातक पुर्ति करवाने के लिए पुन: परीक्षा लिया था। हो सकता है इसी वजह से वजह से मैं हमेशा क्षतिग्रस्‍त बच्‍चों से जुड़ी रही हूँ? प्रोफेसर डिंगल ने इस बात पर क्‍यों जोड़ डाला था है कि मैं ही वह उत्तम शिक्षक हूँ, जबकि मेरे से विपरीत पीपा बखूबी व्‍यवस्थित दिख रही थी।

"और अगर कोई कठिनाई हो तो मैं किसे कॉल कर सकती हूँ?" मैंने पूछा।

"मैं यहाँ किसी को नहीं जानती। मैं तो यह भी नहीं जानती की यहाँ का आपातकालीन कक्ष कहाँ है।"

"श्रीमति हेसटिंग्‍स तुम्‍हारी मद्द करने के लिए तैयार हैं और वो हर हफ्ते के किसी एक दोपहर को पीपा का देखरेख करने के लिए भी राज़ी है ताकी तुमको अपने लिए भी कुछ समय मिल सके," एडम का स्‍वर कठोरता के सीमा पर था।

"मैं श्रीमति हेसटिंग्‍स पर नि:सन्‍देह विश्‍वास रखता हूँ। तुम यहाँ हो क्‍योंकि उन्‍होंने मुझे राज़ी करवाया था की मेरी बेटी का ख्‍याल उसे शिविर में न भेजकर मैं यहाँ बेहतर रख सकता हूँ।"

पीपा की निगाह चाय की प्‍याली में गढ़ गई।

"इसके अलावा," उन्‍होंने मेरी झिझक को देखते हुए कहा,"हमारे पास यहाँ एक हस्‍पताल भी है। बस ये है की वह एक आम दवाखाने जैसा ही है।"

"ठीक है," मैंने कहा, मेरा स्‍वर लघु था। "मुझे ये पूछना नापसंद है, किन्‍तु कितना — अ"

"तुम्‍हें पाँच सो आस्‍ट्रलियाई डालर प्रति सप्‍ताह मिलेगा उसके साथ गर्मियों के अंत में दो हजार डालर का बोनस भी मिलेगा। इसके अंतगर्त तुम्‍हारा कमरा एवं भोजन, तथा खर्चे और पीपा के साथ किए हुए कोई भी भोजन इत्‍यादी शामिल है।"

मैंने उस उत्‍सुक नन्‍ही लड़की की ओर झांका जो मुझे आशा भरी चाँदी सी आँखों से घूर रही थी। ये एक कम खर्चे के साथ उदार प्रस्‍ताव था, वह नन्‍हीं लड़की भी प्‍यारी थी, और ये मुझे ग्रेगोरी के धोखे के घाव को भरने के साथ-साथ व्‍यस्‍त रखता।

इस नौकरी से मुझे एक सुन्‍दर अपार्टमेंट की पहली, आखिरी एवं सुरक्षा जमा-राशि देने के लिए पर्याप्‍त धन प्राप्त होता और तो और ये आर्थिक प्रतिरोधक भी होता जब तक मैं एक स्‍थाई नौकरी न खोज लूँ। इसके अतिरिक्‍त आखिरी बार मेरे लिए स्‍वागत का बोर्ड किसने बनाया था भला?

"मैं कब से काम शुरू करूँ।"

पहली बार एडम ने एक स्‍वाभाविक हँसी दी । उनके आँखों के इर्द-गिर्द की सिकुड़ी हुई रेखाऐं लुप्‍त हो गईं और उम्र भी घटकर इस बात को प्रकाशित कर रही थी की वे मुझसे ज्‍यादा बडे़ नहीं दिख रहे थे।

"तुम फौरन काम शुरू कर दो। इस बात को सुनिश्चित करते हुए शुभारंभ करो कि हमारी मिस मफ्फेट अपने हिस्‍से की चाय की प्‍याली धो दें। यहाँ सभी को अपनी जिम्‍मेदारियाँ खुद ढोनी पड़ती है।"

ये कहते हुए उन्‍होंने अपना हाथ बढ़ाया।

"सौदा?"

मैंने उनका हाथ थामा और हिला कर कहा, "सौदा।"



अध्‍याय 2

"क्‍या तुम चाहती हो की मैं ये सामान अंदर ले जाने में तुम्‍हारी मदद करूँ?"

अगर मुझमें ज़रा-सा भी ज्ञान होता तो शायद में एडम को "ना" कह देती किन्‍तु मेरी जुबान ने चचंलता से "हाँ" बोल दिया क्‍योंकि शायद एक अरसे बाद किसी पुरूष ने सहायता के लिए हाथ बढ़ाया था।

इसके पहले की मेरी बुद्धि जाग पाती और बोलती "क्‍या हो तुम, बेअकल, लड़की? क्‍या तुम वाकई चाहती हो की तुम्‍हारे नये नियोक्‍ता को पता चले की तुम अपने नौकरी के साक्षात्‍कार के वक्‍त ही अपने अपार्टमैंट से सारा सामान लेकर ही पहूँची हो?"

मैंने उत्तेजित होकर बोला। और फिर जुबान पे लगाम लगाई। छोटे से आतुर पूडल कुत्ते के जैसे "अवश्य" बोलने के पश्‍चात, मैं और कर भी क्‍या सकती थी? एक लम्‍बी थका देने वाली स्‍पष्‍टीकरण देना चाहिए था क्‍या मुझे?

रास्‍ता दिखाने के लिए एडम ने मेरा इन्‍तज़ार नहीं किया, परन्‍तु अपने अत्‍यधिक लम्‍बे पैरों से चहलकदमी करते हुए मेरी कार तक पहुँचे। जहाँ उसने मुझे अपने सुदृढ़ कूल्‍हों से भरा जीन्‍स का उन्‍मुक्‍त द्रृश्‍य प्रदान किया। मेरे गाल इस आभास से गर्म हो उठे की, ग्रेगोरी की माँद छोड़ते वक्‍त नासमझी की अभिलाषा में मैंने गलती से अपना सूटकेस हरेक अलग-अलग सामानों के नीचे दबा दिया था। उस झमेले में छानबीन करते हुए एडम मुझे कौतुहल से देख रहे थे।

"तुमने वाकई में बहुत ज्‍यादा सामान लाया है"

अगर उस स्‍थान पर मेरे रेंगने लायक कोई बिल होता, तो भगवान की कसम खाकर कहती हूँ मैं उसमें कूद गई होती।

"मुझे अपने पहले अपार्टमेंट से अपना सामान हटाने की जरूरत थी," मैंने कहा। "एक गोदाम जैसे कक्ष के लिए वे प्रति माह तीन सौ डालर माँग रहे थे। सबकुछ तय हो गया था, इसी वज़ह से मैं सब कुछ साथ लेकर आई हूँ।"

"तुमने कुछ सामान अपने परिवार के पास क्‍यों नही छोड़ दिया?"

मेरा मुख एक कठोर रेखा में तन गया। वह नर्क में बिताया एक सर्द दिन होता उसके पहले की कदापि मैं अपनी माँ से पुन: मुलाकात करती। मैंने एडम को जो मेरे से संभव हो सके वैसा सबसे छोटा झूठ बोला।

"मेरे पिता आजकल स्‍पेन में रहते हैं।"

एडम की नीली-हरी आँखे एक चिंताशील भाव में सिकुङ गई किन्‍तु शुक्र है उसने आगे प्रश्‍न न करने का निश्‍चय लिया। मैं क्‍या बोल सकती थी? यही की मैं आस्‍ट्रेलिया के दुरतम बसा हुआ बौर्क शहर में अपनी डरावनी जीवन की कठिनाईयों से भागने के लिए आई हूँ।

जब मैंने कार की पिछली सीट से किताबों का बक्‍सा निकालते हुए लम्‍बी साँस ली, मैंने एडम को तकिये से भरा हरे कचरे का बैग थमा दिया। जैसे ही मैं अपने सूटकेस के कुंदे के पास तक पहूँची, एडम बडे ही संदिग्‍ध ढंग से एक घुटने पर डगमगा रहे थे। वह निकम्‍मा सूटकेस तो बर्फ के पहाड़ नुमा कबाड़ में धसा हुआ था।

"क्‍या तुम पुरी गर्मी इस सामान को अपनी कार में रखने का इरादा रखती हो?"

जैसे ही उसने अपने आपको हंसने से रोका एडम के होंट फड़क उठे । मैंने उस विशाल सफेद कोठार को देखा जो फार्म शैली के घर के तुलना में बौना दिख रहा था, शायद उसके आकार से आठ या नौ गुना छोटा।

"मैं इस शहर में एक गोदाम खोजने की आशा कर रही थी," मैंने कहा। "किन्‍तु आपके पास तो इतना बड़ा कोठार है, अगर मैं ये सब उधर रख दूँ तो क्‍या आप बुरा मानेंगे?"

जैसे ही यह सुनकार एडम की हँसी फूट पड़ी उसका मुखौटा चकनाचूर हो गया । वह एक उत्‍कृष्‍ठ हंसी थी, विस्‍तृत श्‍वेत दांतों युक्‍त, ऐसी हंसी केवल उन मर्दों के मुख पर देखी जाती थी जो आस्‍ट्रेलिया के पुरूषों की पत्रिका GQ के प्रथम पृष्‍ठ की शोभा बढ़ाते थे।

उन्‍होंने तकिये को कार के छत पर रखा तथा मेरे हाथों से सामान लेने के लिए पहूँचे।

"लाओ, मुझे इस सामान को उठाने दो।"

"मैं कर सकती हूँ।"

"मैं आग्रह करता हूँ।"

उन्‍होंने वह भारी डब्‍बा मेरे हाथों में से ले लिया, क्‍या ये स्‍वीकृति थी? "हाँ, तुम अपना कबाड़ मेरे कोठार में रख सकती हो।" पूछने के बजाए मैंने अपने सूटकेस तक पहूँचने के लिए मैंने उस डब्‍बे को बाहर खिंच के निकाला, जिसमें चिंहित था, "द्वितीय समेस्‍टर:- द्वैत मेजर।" वह मरम्‍मत किया हुआ लकड़ी का बक्‍सा कम से कम 25 किलो भारी था।

"वैसे इसमें क्‍या रखा है?" एडम ने वह डब्‍बा खिसकाते हुए पुछा।

"मेरी पुरानी किताबें। मैं इन्‍हें विश्‍वविद्यालय के किताबों के दुकान में वापस बेचने की सोच ही रही थी लेकिन वे नए प्रकाशन में बढ़ चुके थे और इन्‍हें नहीं खरीदना चाहते थे। इनकी इतनी कीमत है कि मुझे इन्‍हें बाहर फेंकना का दिल नहीं किया।"


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